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उस पाक़ निशा कि बात वही,
जो चुरा सूर्य से रौशनी
कर दे रोशन उस चाँद को;
है ख़बर खुदा को पर ख़ैर नहीं |

है ख़बर उन सारे तारों को,
कि ये राज़ मिसाल-ए-मोती बिखेर दे,
बस डर इतना, कहीं
गर्दिश में खुदा न फेर दे |

क्योंकि,
उस पाक़ निशा कि बात यही ||

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