Photograph: Oshi Alika Narayan

तुम्हारे यूँ लौटने का मैं क्या मतलब समझूँ  ?

जो इंतज़ार मैंने इस दरमियाँ किया है
जो अश्क़ मैंने बहाएं हैं
जो दुआएं मैंने कभी मांगी थी
जो धागे मज़ारों पर बाँधी थी
जो हुस्न मैंने खोया है
जो ज़ख्म मैंने पाया है
जो दर्द मेरा…. गोया है
क्या तुम्हारे लौटने की वजह ?

या मैं यूँ समझूँ,

कि किसी और ने तुम्हें चाहा नहीं
कि तुम काबिल-ए-वफ़ा नहीं
कि शर्तें तुम्हारी चली नहीं
कि परतें तुम्हारी खुली नहीं
कि राहें सही मिली नहीं
कि फ़ालें तुम्हें जचि नहीं
क्या टूटा दिल तुम्हारा नहीं ?
क्या फूटा आंसू तुम्हारा नहीं ?

ये चश्म-पुरआब तुम्हारी एक ज़िंदा झलक को इस्बात थी,
तुम्हें अब देखना इन्हें ना-गवार है  ||

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